बच्चे इंतजार करते रहे मां का, मौत की खबर पहुंची - Silver Screen

बच्चे इंतजार करते रहे मां का, मौत की खबर पहुंची

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ग्वालियर। तेज रफ्तार ट्रक ने तीन बच्चों के सिर से मां का साया छीन लिया। बच्चे अपने माता-पिता के घर लौटने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन मां की मौत की खबर पहुंची। हादसा गुरुवार सुबह 6.30 बजे बड़ागांव हाइवे पर हुआ। तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक में सामने से टक्कर मार दी, जिससे बाइक पर बैठी महिला सडक़ पर गिर गई और ट्रक का पहिया उसके ऊपर से निकलने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। बाइक चला रहा पति उछलकर दूर गिरा, लेकिन हेलमेट पहने होने से उसकी जान बच गई। घटना के बाद भाग गए ट्रक को पुलिस ने ढाबे के पीछे से बरामद कर लिया, लेकिन चालक भाग चुका था।

पुलिस के मुताबिक सूरो बेहटा गांव निवासी देवेन्द्र परिहार पत्नी जानकी (28) की दाढ़ का इलाज कराने के लिए राई गांव लेकर गए था। बेटी प्रियंका, संजना और बेटे विवेक को घर पर छोड़ गए थे। उनसे कहकर गए थे कि कुछ देर बाद घर लौट आएंगे। इलाज कराकर पति-पत्नी तुरंत लौट भी लिए, लेकिन बड़ागांव हाइवे पर तेज गति से आ रहे ट्रक एचआर 73 ए 8070 ने सामने से उनकी बाइक में टक्कर मार दी, जिससे ट्रक के पहिए के नीचे आने से जानकी की मौत हो गई, जबकि देवेन्द्र घायल हो गए। राहगीरों ने पुलिस को जानकारी दी, जिस पर कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई। घायल देवेन्द्र को अस्पताल भेजकर ट्रक की तलाश की गई।

ट्रक के टायर में लगा था खून
महिला को कुचलकर ड्राइवर ट्रक लेकर भाग गया। राहगीर ने एफआरवी-18 को इसकी जानकारी दी, जिस पर तैनात पुलिसकर्मियों ने कंट्रोल रूम में भागीरथ सिंह को खबर दी। उन्होंने तत्काल गश्त पर निकले ट्रैफिक डीएसपी नरेश अन्नोटिया को बताया। डीएसपी मौके पर पहुंचे, पता चला कि ट्रक का रंग कत्थई है, उस पर त्रिपाल डली है। वह और एफआरवी 7 बड़ागांव से होटल, ढाबे चेक कर आगे बढ़ रहे थे, तभी गिरधारी ढाबा के पीछे ट्रक खड़ा मिल गया, लेकिन ड्राइवर भाग चुका था। ट्रक के पहिए में खून लगा था।


बच्चे स्तब्ध रह गए
जानकी बच्चों से बोलकर गई थीं कि जल्द लौटकर आएंगी, इसलिए दोनों बेटी और बेटा उनके लौटने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन माता-पिता घर नहीं लौटे, मां की मौत की खबर घर पहुंच गई। तीनों बच्चे अभी छोटे हैं। देवेन्द्र पेट्रोल पंप पर काम कर उनका पालन-पोषण कर रहे हैं। मां जानकी से बच्चों का ज्यादा स्नेह था। मौत की खबर मिलते ही बच्चे स्तब्ध रह गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। रिश्तेदार बच्चों को समझाने में लगे हुए थे।



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