ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में शुक्रवार को कुलसचिव डॉ. आइके मंसूरी और कॉलेज डवलपमेंट काउंसिल के डायरेक्टर प्रो. डीडी अग्रवाल के कक्ष के बाहर लगी नेमप्लेट पर कालिख फेंद दी। अचानक हुई इस हरकत से पहले तो कार्यालय और लॉबी में मौजूद कर्मचारी कुछ समझ नहीं पाए, जब तक समझे तब तक कालिख फेंकने वाले सीढिय़ां उतरकर गायब हो गए थे। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अब सीसीटीवी फुटेज और आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ कर कालिख फेंकने वालों का पता लगाया जाएगा।
दरअसल, विवि में आर्थिक अनियमितताओं, परीक्षाओं के परिणाम में देरी, छात्रों की अंकसूचियों में त्रुटियां और परीक्षा समय से न कराए जाने को लेकर छात्र लगातार परेशान हैं। छात्रों की इस परेशानी को लेकर एनएसयूआई, एवीबीपी, ऑल इंडिया डीएसओ जैसे छात्र संगठनों ने प्रशासनिक भवन के बाहर कई बार प्रदर्शन किया है। कुछ मामलों में तो एनएसयूआइ और एवीबीपी जैसी धुर विरोधी संगठनों ने एक साथ मिलकर प्रदर्शन किया है। इसके बाद भी विवि की आंतरिक और बाहरी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। इसको लेकर एनएसयूआइ के प्रदेश महासचिव सचिन द्विवेदी ने ग्वालियर से भोपाल तक पैदल यात्रा करके मुख्यमंत्री कमलनाथ, उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बात करके छात्रों की पूरी समस्या बताई थी। इसके बाद विवि प्रबंधन ने भी व्यवस्थाओं को चौकस करने के लिए आश्वासन दिया था, लेकिन परीक्षा और परिणाम की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। छात्र संगठन एवीबीपी ने छात्रों की समस्या को लेकर दो दिन पहले ज्ञापन दिया था और शुक्रवार को प्रदर्शन किया, इसी बीच किसी ने अधिकारियों के नामों पर कालिख पोत दी। इस मामले में एवीबीपी महानगर मंत्री का कहना था कि उनके संगठन में से किसी ने इस घटना को अंजाम नहीं दिया है, यह छात्र हित मे चल रहे आंदोलन की दिशा भटकाने की कोशिश है।
पहले भी फिंक चुकी है स्याही
कुछ समय पहले छात्रों की समस्या का समाधान न होने पर तत्कालीन डीआर, परीक्षा नियंत्रक की पट्टिकाओं पर एनएसयूआई ने स्याही पोती थी। जबकि एनएसयूआई के आंदोलन के समय किसी ने रात के समय कुलपति के दरवाजे पर लगी नाम पट्टिका पर कालिख पोत दी थी। इस मामले में विवि प्रशासन ने पुलिस में प्रकरण भी दर्ज कराया था। अब दोबारा से कालिख फेंके जाने की घटना होने से विवि के अधिकारियों में अलग-अलग तरह की चर्चा व्याप्त है।
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