ग्वालियर। नगर निगम परिषद की गुरुवार को हुई बैठक में रोजाना पेयजल सप्लाई का मुद्दा छाया रहा। पार्षदों ने कहा कि पीएचई अधिकारियों ने रोजाना सप्लाई में आ रही समस्याओं का निराकरण नहीं किया। बिना तैयारी के सप्लाई की जा रही है, जिससे स्थिति सुधरने के बजाए बिगड़ गई है। इस पर सभापति राकेश माहौर ने निगमायुक्त संदीप माकिन को आदेश दिया कि जिन क्षेत्रों में कोई समस्या नहीं है वहां रोजाना पेयजल सप्लाई चालू रख सकते हैं, लेकिन जिन क्षेत्रों में रोज पानी नहीं पहुंच पा रहा है वहां एक दिन छोडकऱ ही पानी की सप्लाई की जाए। उधर वार्ड-10 में 7 दिन से पानी की किल्लत होने पर भाजपा पार्षद जय सिंह सोलंकी आसंदी के सामने धरने पर बैठ गए और सभापति के समझाने पर भी नहीं माने। वह बैठक समाप्त होने पर भी नहीं उठे, बाद में जब उन्हें वीडियो कॉलिंग से बताया गया कि उनके वार्ड में लाइन मिलान का काम शुरू हो गया है, तब उन्होंने धरना समाप्त किया।
परिषद की बैठक में बिंदु क्रमांक 7 पर चर्चा चल रही थी, इस पर पार्षद अपनी राय रख रहे थे, तभी वार्ड 10 के पार्षद जय सिंह सोलंकी ने कहा कि उनके क्षेत्र में 7 दिन से पानी नहीं आ रहा है और पीएचई के अधीक्षण यंत्री आरएलएस मौर्य व कमिश्नर उनका फोन नहीं उठा रहे हैं। यह कहकर वह सभापति के सामने जमीन पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि जब तक पानी की लाइन का मिलान कर समस्या दूर नहीं की जाती वह धरने पर बैठे रहेंगे। सभापति ने कहा कि अधिकारी कल तक समस्या दूर कर देंगे, लेकिन सोलंकी नहीं माने। उनके समर्थन में जगदीश पटेल भी बैठ गए, भाजपा पार्षदों ने भी धरना समाप्त करने के लिए कहा, लेकिन सोलंकी ने मना कर दिया। जिससे बैठक 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई, लेकिन जब धरना समाप्त नहीं किया तो शोक प्रस्ताव के बाद शाम 5.40 बजे 16 सितंबर तक बैठक स्थगित कर दी गई, तब भी सोलंकी और पटेल धरने पर बैठे रहे। बाद में उनके साथ भूपेन्द्र मोगनिया, बृजेश गुप्ता, पुरुषोत्तम टमोटिया भी धरने पर बैठ गए। जब शाम 7 बजे वीडियो कॉलिंग के जरिए क्षेत्र के व्यक्ति ने सोलंकी को कार्य शुरू होने की जानकारी दी, तब उन्होंने धरना समाप्त किया। यह पहली बार था कि सदन की बैठक खत्म होने के बाद भी पार्षद सदन में धरने पर बैठे रहे।
तलघर मामले में कोर्ट का दिया हवाला
परिषद की बैठक के एजेंडे में तलघर को लेकर भी बिंदु शामिल था। इस पर चर्चा हुई तो कमिश्नर संदीप माकिन ने कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मामला कोर्ट में चल रहा है, इसलिए इस पर कोई भी निर्णय फिलहाल नहीं लिया जाए।
स्वीकृति के बाद भी काम नहीं
पार्षद धर्मेन्द्र राणा ने कहा कि किसी भी कार्य का टेंडर होता है तो वह नगर निगम कमिश्नर के आदेश के बाद ही होता है। टेंडर के साथ बजट भी लगता है, लेकिन वर्क ऑर्डर होने के बाद भी उसे स्वीकृति नहीं मिल पाती है। सालों पहले जो काम स्वीकृत हो चुके हैं वह अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। जिसके कारण पार्षदों को क्षेत्र में शर्मिंदा होना पड़ता है। इस पर सभापति ने निगम कमिश्नर को जो वर्क ऑर्डर हो चुके हैं उनके काम शुरू कराने के आदेश दिए।
इंजीनियर नहीं बना पाते एस्टीमेट
पार्षद घनश्यामदास गुप्ता ने कहा कि क्षेत्रीय अधिकारी की लापरवाही के चलते 15 लाख पार्षद निधि लैप्स हो गई। उन्होंने कहा कि जेडओ एस्टीमेट बनाकर फाइल ही तैयार नहीं कर पाते हैं, ऐसे अधिकारियों का क्या मतलब है। इस पर सभापति ने निगमायुक्त को निर्देश दिए कि ऐसे अधिकारियों की जांच कर तत्काल हटाया जाए।
परिषद में रखें आय व्यय
नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित ने कहा कि नगर निगम की आय और व्यय की जानकारी अप्रेल में ही आनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक नहीं आई है। उन्होंने कहा कि वैसे तो यह एमआइसी के समक्ष प्रस्तुत की जाती है, लेकिन निगम एक्ट में ऐसा प्रावधान है कि अगर महापौर न हों तो परिषद में इसे रखना होता है। उन्होंने कहा कि ईको ग्रीन को लेकर सदन में जो ठहराव किया गया था, उस पर भी कोई अमल नहीं किया गया। निगमायुक्त ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि ईको ग्रीन को लेकर शासन स्तर पर कुछ निर्णय लिए जाने हैं। क्योंकि अभी इस स्थिति में नहीं है कि कंपनी को हटाने की कार्रवाई करें, अगर ऐसा किया तो हम पीछे चले जाएंगे।
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