ग्वालियर। शहर से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उदगवां के मड़ोरी माता मंदिर परिसर में बना शिव मंदिर का इतिहास अद्भुत है। यहां के शिव मंदिर की स्थापना के सही समय के बारे में तो गांव व आसपास के लोग नहीं बता पा रहे पर जिन बुजुर्गों या जानकारों से बात करो वे यही कहते हैं कि यहां की सिद्धि वर्षों से चली आ रही है। इतना जरूर बताया जा रहा है कि यहां स्थापित शिवलिंग खेत में पड़ा हुआ था।
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दतिया दिनारा मार्ग पर स्टेट हाइवे पर दतिया से महज 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस शिवमंदिर कि तालाब के किनारे स्थित होने के कारण कई बार तालाब का पानी यहां तक पहुंच जाता है पर कभी भी इसकी कोई क्षति नहीं हुई। यहां भी मुगल बादशाह ने आतंक बरपाया था और तमाम मूर्तियां टूटी हुई हालत में मिली थीं। इन्ही में से एक शिवलिंग मड़ोरी वाले शिवजी की थी।
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शिवलिंग दो, नंदी प्रतिमा एक
मंदिर की खासियत यह है कि अमूमन शिवमंदिर में नंदी महाराज की प्रतिमा शिवलिंग से छोटी होती है पर यहां देखा जा सकता है कि नंदी महाराज की विशाल प्रतिमा है। एक खास बात और कि यहां शिवलिंग दो जबकि नंदी महाराज की एक ही प्रतिमा है।
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इसलिए खास है
गांव जानकारों बालमुकुंद दुबे. फेरन सिंह फौजदार ,अरुण पटेरिया आदि का कहना है कि उन्होंने बहुत से मंदिर देखे पर इस तरह एक मंदिर में दो शिवलिंग बिरले ही स्थानों पर मिले। सामान्य दिनों में तो लोग यहां जलाभिषेक करने तो आते ही हैं श्रावण मास में तो महिला व पुरुष भक्तों का यहां तांता लगा रहता है।
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