ग्वालियर. शहर को साफ करने में फिसड्डी साबित हुए नगर निगम के अधिकारी अब स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 के पहले क्वार्टर की परीक्षा में अपनी लाज बचाने के लिए जनता के आसरे हैं। स्वच्छ भारत मिशन की टीम 15 जुलाई के बाद शहर में आएगी और विभिन्न स्थानों पर भ्रमण कर लोगों से सवाल कर सफाई की हकीकत जानेगी, इसलिए निगम अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों को सफाई व्यवस्था से संबंधित सवालों के जवाब रटाए जा रहे हैं, जिससे लोग पॉजिटिव जवाब दें और निगम को नंबर मिल सकें।
लेकिन हकीकत में निगम को जो तैयारियां करनी थीं, वह अभी तक नहीं हो पाई हैं, जिसके कारण इस बार भी कई क्षेत्रों में अंक नहीं मिलेंगे। शहर में अब भी जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं और गीला-सूखा कचरा भी अलग नहीं किया जा रहा है, न ही सभी वार्डों से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हो रहा है। इस कारण 2000 अंकों के लिए होने वाली इस परीक्षा में कई क्षेत्रों में नंबर नहीं मिलेंगे, जिसका असर फाइनल रैंकिंग पर पड़ेगा। क्वार्टर रैंकिंग में स्कोर पब्लिक के ऊपर निर्भर करेगा।
...तो नहीं मिलेंगे दो हजार अंक
स्वच्छता सर्वेक्षण का पहला क्वार्टर अप्रेल से जून तक था। 2 हजार अंक के लिए नगर निगम ने जो जानकारी विभिन्न क्षेत्रों में अपलोड की है, स्वच्छ भारत मिशन की टीम के सदस्य आकर उसका परीक्षण करेंगे। अगर जानकारी सही होगी तो ही निगम को अंक मिलेंगे। खास बात यह है कि इन अंकों में शहर के लोगों की भी भागीदारी होगी। टीम के सदस्य अलग-अलग सेगमेंट के हिसाब से जनता से सवाल करेंगे, अगर लोगों ने जवाब सही नहीं दिए तो भी अंक नहीं मिलेंगे।
इसलिए नगर निगम द्वारा लोगों को बताया जा रहा है कि गीला और सूखा कचरा किस तरह गाड़ी में डाला जाता है और प्रोसेस के लिए इसे कहां भेजा जाता है। लोगों को यह भी बता रहे हैं कि अगर कोई आकर पूछे कि कचरा कहां जाता है तो उसे बताएं कि कचरा वाहनों से लैंडफिल साइट पर जाता है, जहां गीले कचरे से खाद और सूखे कचरे से बिजली बनेगी।
पब्लिक बताएगी हकीकत
- नगर निगम ने जो दावे किए हैं उनकी हकीकत स्वच्छ भारत मिशन की टीम जनता से पता करेगी। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के 45 अंक हैं, इसमें लोगों से पूछा जाएगा कि कचरा रोजाना उठ रहा है या नहीं।
- कचरा सेग्रीगेशन के 60 अंक हैं, लोगों से पूछा जाएगा कि क्या उनसे सूखा और गीला कचरा अलग-अलग लिया जाता है।
- सभी वार्डों में शत-प्रतिशत सफाई के 30 अंक हैं। इसमें लोगों से पूछा जाएगा कि उनके क्षेत्र में सफाई से वह संतुष्ट हैं या नहीं।
- प्लास्टिक का उपयोग न करने के 15 अंक हैं। इसमें लोगों से पूछा जाएगा कि क्या वह प्लास्टिक बैग, पानी की बोतल, डिस्पोजल ग्लास आदि का उपयोग करते हैं या नहीं।
- स्वच्छता रैंकिंग के 40 अंक हैं, इस संबंध में पूछा जाएगा कि क्या उन्हें इस बारे में जानकारी है कि शहर में हॉस्पिटल, होटल आदि की स्वच्छता रैंकिंग जारी की गई है।
कार्य जो अभी हैं अधूरे
- नगर निगम की अप्रेल से जून तक होने वाली रैंकिंग में जिन बिंदुओं पर अंक मिलना हैं, उसमें से कई कार्य निगम ने अभी तक पूरे नहीं किए हैं, जिससे अंक नहीं मिल पाएंगे।
- शहर में पॉलीथिन का उपयोग हो रहा है।
- सभी वार्ड 100 प्रतिशत साफ नहीं हो पाए हैं।
- कई जगहों पर अभी भी डस्टबिन लगे हैं।
- डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन भी नहीं हो रहा है।
- सूखा और गीला कचरा अलग-अलग नहीं डाला जा रहा।
- सडक़ों पर झाडू भी नहीं लगाई जा रही है।
लगातार काम कर रहे हैं
स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए 15 जुलाई के बाद टीम आएगी और परीक्षण करेगी। सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं, इसके लिए अधिकारियों को वार्ड स्तर पर भी तैनात किया है। अगर कोई अधिकारी लापरवाही बरतेगा तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संदीप माकिन, कमिश्नर नगर निगम
रैंकिंग शहरवासियों पर निर्भर
स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग शहरवासियों पर निर्भर है। टीम के सदस्य आकर लोगों से सवाल जवाब करेंगे, निगम द्वारा लोगों को इसके संबंध में जानकारी दी जा रही है, उन्हें जागरूक किया जा रहा है जिससे हमने जो काम किया है उसके आधार पर अंक मिल सकें।
श्रीकांत कांटे, नोडल स्वच्छता सर्वेक्षण
निगम कर्मचारी कचरे के बारे में बता रहे थे
निगम कर्मचारी घर पर आए थे और कचरे से संबंधित विभिन्न जानकारी दे रहे थे। उन्होंने सूखा और गीला कचरा कहां जाता है, गीला और सूखा कचरा के लिए अलग अलग डस्टबिन हैं या नहीं इसके बारे में बताया।
महेन्द्र सिंह, निवासी गुढा़
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