छात्रा के साथ बदसलूकी के बाद भी नहीं चेते स्कूल संचालक, वेबसाइट पर नहीं वाहनों की जानकारी - Silver Screen

छात्रा के साथ बदसलूकी के बाद भी नहीं चेते स्कूल संचालक, वेबसाइट पर नहीं वाहनों की जानकारी

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ग्वालियर। लगातार घटनाएं होने के बाद भी निजी स्कूलों के संचालक बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं हुए हैं। अब भी स्कूलों की वेबसाइट पर परिवहन सेवा की जानकारी नहीं दर्शायी जा रही है। यही कारण है कि अभिभावक स्कूल के बाहर खड़े वाहनों को वैध मानकर सेवाएं लेना शुरू कर देते हैं। स्कूलों में बच्चों को ले जाने वाले वाहनों में नियमों का पालन नहीं किए जाने से लगातार हादसे हो रहे हैं। बीते साल दो स्कूल वैन आगजनी की शिकार हुई थीं। अब कुछ दिन पहले एक वैन चालक ने छात्रा के साथ छेड़छाड़ कर दी। इसके बाद भी स्कूल संचालक परिवहन सेवा में पारदर्शिता लाने में लापरवाह हैं।

 

निजी स्कूल संचालकों ने अपने संस्थान शहर से 10 से 15 किमी दूर शिवपुरी लिंक रोड, बड़ा गांव और मुरैना लिंक रोड पर स्थापित कर रखे हैं, इनमें पढऩे के लिए छात्र-छात्राओं को बस, वैन या फिर ऑटो से जाना होता है। प्रवेश के बाद अभिभावक स्कूल परिसर में या बाहर खड़े वाहन चालक से संपर्क करते हैं। चालक स्वयं को स्कूल की ओर से सेवा प्रदान करने की बात कहता है, जिसके भरोसे पर वे छात्र को लाने ले जाने मासिक फ ीस देते हुए सेवा लेना शुरू कर देते हैं।

 

स्कूल की वेबसाइट पर हों वाहनों के नंबर
निजी स्कूल मोटी फीस लेकर छात्रों को गुणवत्ता युक्त पढ़ाई के साथ अन्य सुविधाएं देने का दावा करते हैं। स्कूलों को छात्रों की सुरक्षा के दायित्व का निर्वहन करते हुए परिवहन सेवा देने वाले वाहनों के नंबर ऑनलाइन प्रदर्शित करना चाहिए। इसके अलावा कौन-सा वाहन किस रूट से आता जाता है, किस वाहन में कौन चालक है, उसका मोबाइल नंबर, हेल्पर के अतिरिक्त वाहन में सीसीटीवी कैमरा, जीपीएस सिस्टम, सीट संख्या आदि की जानकारी भी दर्शाना चाहिए। इससे अभिभावकों की चिंताओं पर विराम लगेगा और वे जरूरत पडऩे पर उनकी जांच भी कर सकेंगे।

 

फैक्ट फाइल
-शहर में निजी स्कूलों में पढऩे वाले छात्र करीब- 1.5 लाख
-स्कूल बसें करीब-950
-ऑटो और वैन करीब-2500

 

 

स्कूल पर बढ़ेगा विश्वास
प्राइवेट स्कूल महंगी शिक्षा दे रहे हैं। उनके द्वारा आधुनिक संसाधनों का उपयोग किए जाने का भरोसा अभिभावकों को दिया जाता है। स्कूल अपनी वेबसाइट पर बस, वैन और ऑटो की जानकारी अपलोड करें और वाहनों के नंबर सहित अन्य सुविधाओं की जानकारी दें, जिससे अभिभावकों का स्कूल पर विश्वास बढ़ेगा। जीपीएस सिस्टम से वह स्वयं छात्र की लोकेशन घर बैठे ट्रेस कर सकेंगे।
एमएस सिकरवार, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी



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