नशे का शिकार होता हमारा समाज एवं देश - Silver Screen


शराब पीकर वाहन चलायें.............


       आजकल शराब पीकर वाहन चपामे का शपक तो ऐवसे बढ़ मसा गया है जैसे कि, मानो कोई खजाने का पाने की होड़ से लगी हो, परन्तु ऐसा करने सोचने वालों कों इस बात का कोई अंदाजा नहीं होता है कि, शायद यह सोचने ऐसा करने के बाद यह दुनियां उनके लिये कोई सपना सा होकर रह जायेगी। आज के युवा जो अपने आप को मोडर्न कहते हैं तथा शराब अथवा अन्य किसी नशीले पदार्थों का सेवन जैसे कि, भांग, गांजा, स्मैक, हैरोइन, चरस इत्यादि का सेवन करते हैं तथा ऐसा करने से उनके दिमाग के सोचने समझने की क्षमता पर गहरा प्रभाव पड़ता है तथा उनको ऐसा प्रतीत होता है कि, अब बस सब कुछ उनके कब्जे मैं उनके नियंत्रण में वह कुछ भी कर सकते हैं पलक झपकते ही इस पार से उस पार तक बिना किसी परेशानी के जा सकते हैं। देश का भविष्य जो कि युवा वर्ग होता है वह ही इस प्रकार के नशों के सेवन का आदी पड़ चुका है जिससे निजात पाना मुश्किल सा होता जा रहा है। देश के होनहार युवा जो कि आयेदिन सड़क हादसों में अपनी जान गंवा बैठते हैं, कुछ युवा तो वह होते हैं जिसके सहारे अथवा उनके बल बूते पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी होती है तथा कुछ ऐसे भी होते हैं जिनको समाज को जरूरत नहीं होती है, परन्तु यहां यह कहना लाजिमी होगा कि, युवा युवा होते हैं उनकी जान देश के लिये बहुत कीमती होती है और यह जान सड़क हादसों में ऐसे ही चली जाती है जिससे देश को बहुत बड़ा नुकसान होता है। हमें जरूरत है देश के युवाओं में ऐसी शिक्षा एवं जागरूकता फैलाने की जो यह सोचे कि देश ही सर्वोपरि है, परिवार भी महत्वपूर्ण होता है इस बात को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। 
आसानी से मिल जाता है ‘‘नशा’’
          आम तौर पर 20 वर्ष पूर्व की बात करें तो आज जो नशा खुले आम आमजन के लिये उपलब्ध है वह भी बहुत कम कीमतों पर। सड़कों, बाजारों, ढाबों, होटलों, गली मौहल्लों, परचूनी की दुकानों पर भी यह नशा आसानी से मिल जाता है। बस आप एक सौ-दौ सौ का नोट थमा दीजिये और नशा आसानी से आपके हाथ में। वैसे जो शराब, भांग के बेचे जाने हेतु सरकार की ओर से लायसेंस दिया जाता है जिन्हें ठेकेदार अपनी मन मर्जी से रिश्वतखोर अधिकारियों को रिश्वत देकर वहां पर दुकान खोल लेते हैं जहां पर बाजार, स्कूल, काॅंलेज, व्यवसायिक प्रतिष्ठान आबादी निवास करती है और जिम्मेदार अपनी आंखे मुंदकर चुपचाप बैठे हैं जिनको इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि, इन सस्से नशों के सेवन से आने वाली पीढ़ी देश का भविष्य युवा कितना प्रभावित होगा। ठेकों पर मिलने वाली सस्सी सी शराब केवल हमारे शरीर को खराब करती है अपितु देश के भविष्य को काल मुंह में ले जाती है। 
कौन-कौन होता है नशे का शिकार

          आमतौर पर नशे का जो सेवन करता है वह ही इसका शिकार होता है यह हमारे दृष्टिकोण से ठीक लगता है, परन्तु ऐसा नहीं है कि, जो इसका सेवन करता है वही ही इसका शिकार होता है, नहीं जो व्यक्ति नशा करता है उसके नशे की लत के कारण से उसका पूरा परिवार प्रभावित होता है, समाज प्रभावित होता है, उसकी आने वाली नस्लें प्रभावित होती हैं अथवा यूं कहें कि, पूरा देश ही प्रभावित होता है। नशे के सेवन की लत लगने के बाद व्यक्ति सोचने समझने की क्षमता खो बैठता है जो अपने कर्तव्यों को भूलकर हर वह काम करता है जो सभ्य समाज के द्वारा निरूद्ध किये गये हैं। नशे की पूर्ति के लिये वह घर का सामान बेचता है, चोरी करता है, लूट डकैती भी करता है यह नहीं वह कभी कभार दूसरे की जान लेने से भी नहीं हिचकता है। हमारे सभ्य समाज का चेहरा सुन्दर नहीं हैं दूसरा पहलू यह भी है कि, नशे का सेवन करने वाला कोई असभ्य व्यक्ति ही हो, सभ्य और पढ़ेलिखे व्यक्ति भी शामिल होते हैं जो समाज से छुपकर नशा करने के आदी हो चुके हैं जिनमें इंजीनियर, डाॅक्टर्स, वकील, बिजनेसमैन, धन्ना सेठ, बूढ़े बच्चे, युवा भी शामिल हैं। नशे के कारण से घर में आये दिन लड़ाई झगड़े होते हैं, परिवार बिखर रहे हैं, कौन है आखिर इन सबका जिम्मेदार ?

बच्चे भी हैं नशे का शिकार
          बच्चे भी नशे की गिरफ्त से दूर नहीं हैं, आजकल आपको नशे किये हुये बच्चे आसानी से दिख जायेगें। बस स्टेण्ड, रेल्वे स्टेशन, मलिन बस्ती आदि में बच्चों के द्वारा किये जाने वाले नशों के प्रभाव आपको दिख जायेगें। यह बच्चे भी समाज का एक हिस्सा हैं, भविष्य हैं देश का परन्तु शिक्षा एवं जरूरतों की पूर्ति के अभाव यह बच्चे बाल मजदूरी का एक हिस्सा हैं जो आपको कचरे के ढेरों से बेचने का सामान, कचरा एकत्रित करते हुये आसानी से मिल जायेगें। यह बच्चे शराब एवं भाग का नशा नहीं करते हैं परन्तु इनका नशा अजीब किस्म का है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा कि, हमारा समाज कहां जा रहा है। इनका नशा है खांसी की सिरप, सिलोचन, व्हाटनर,आयोडेक्स आदि जिनको सूंघकर यह बच्चे नशा करते हैं जो यह नशा हर जगह मौजूद है बिना किसी प्रतिबंध के।
नशे के कारण सड़क हादसे
          नशा करके वाहन चलाने पर होने वाले सड़क हादसों के बारे में जितनी रिसर्च की जाये उतनी कम है, आये दिन सड़क पर देश के होनहार युवा का खून फैलता है जो किसी के काम नहीं आता है। नशे के कारण से होने वाली दुर्घटनाओं में बेहताशा वृद्धि होती जा रही है जिस पर जिम्मेदारों ने अपनी आंखे बंद कर रखी हैं। सवा लाख लोग एक वर्ष में होने वाली दुर्घटनाओं की भेंट चढ़ जाते हैं जो कि, प्रतिदिन का औसत 3,287 है इसके अतिरिक्त 20-50 लाख लोग घायल होते हैं अथवा अपंगता का शिकार होते हैं। सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले 15 से 44 वर्ष की आयु के होते हैं जो कि एक दुखद एवं गंभीर पहलू है इस पर हमको एवं सरकार को मनन करने की जरूरत है।
कौन है नशे को रोकने के लिये जिम्मेदार 

          यहां पर यह कहना अति आवश्यक है कि नशे को रोकने के लिये समाज एवं सरकार को एक साथ खड़ा होना पड़ेगा नहीं तो वह दिन दूर नहीं जो हर घर में नशा होगा और एक सभ्य समाज किताबों में ही दबकर रह जायेगा। नशे का बिक्री को रोकने के लिये दृढ एवं सख्त कदम उठाने होगें, नशे का साथ देने वाले, बढ़ावा देने वाले चाहे वह किसी प्रकार का कोई भी व्यक्ति, सरकारी मुलाजिम, नेता अथवा अभिनेता हो, इस मामले पर नहीं बख्शा जायेगा। कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाकर उसे दण्ड दिया जाना नितांत आवश्यक है। अवैध रूप से नशे का कारोबार करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाना चाहिये। पुलिस भी इस मामले में ढिलमुल रवैया अपनाती है ऐसा करने वालों पर कोई कार्यवाही नहीं करती है जिसके कारण से उनके हौसले बंुंलद होत हैं आज गली-गली मौहल्लों में स्मैक बेकी जाती है कोई कुछ नहीं करता है। घर बरबाद होते हैं पुलिस तमाशा देखते हैं, इस काम को करने वालों से पैसे खाती है। इन मामलों में गली मौहल्ले के छुट भईये नेता भी कम नहीं हैं वह भी आग में घी का काम करते हैं, रोकने की अपेक्षा वह पुलिस से पकड़ा गया आरोपी को छुड़ाने में ज्यादा काम आते हैं। 
कैसे रोकें नशे को
          नशे को रोकने के लिये एक सख्त कानून बनाया जाना अतिआवश्यक है। कानून में संशोधन भी किया जा सकता है। पुलिस को सख्त निर्देश होना चाहिये कि वह इस पर गौर कर कानून का पालन कराया जाना सुनिश्चित करे। समाज को भी इस दिशा में ठोस पहल करनी होगी, जहां पर नशा दिखे तुरंत सख्ती से पेश आकर ऐसे व्यक्तियों को पुलिस के हवाले करे तथा यथा संभव हो कानून की मदद करे तथा साथ नशे के सौदागरों की मदद करने वालों तथा उनके हमदर्दों का सबक सिखायें। स्कूल, काॅलेज, बाजारों, मलिन बस्तिओं, व्यवसायिक केन्द्रों के पास में नशे की दुकानों को बंद कराकर वहां पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाना चाहिये। टी.व्ही., समाचार पत्रों, सोशल मीडिया पर नशे के गंभीर परिणामों पर अधिक से अधिक प्रचार प्रसार होना चाहिये तथा नशे के हर प्रकार के विज्ञापनों पर प्रतिबंध भी लगाया जाना चाहिये। नशे का बढ़ावा देने वालों को हर हालत में पुलिस को सौंपा जाकर उनके विरूद्ध कार्यवाही कराया जाना चाहिये, ताकि फिर कभी किसी का घर टूटे, किसी का बेटा,भाई,पति, पिता समय पर घर पर बिना किसी परेशानी के पहुंचे। नशे के कारण से आज समाज में आये दिन लूट, चोरी, मारपीट, बलात्कार आदि की घटनाऐं बढ़ रही हैं जिनको रोकना होगा।
          शराब पीकर वाहन चलाना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिये जिसकी सजा भी कठोर होना चाहिये, ताकि नशा करने वाला व्यक्ति दुबारा नशा करने की शपथ ले तथा दुबारा नशा करे ताकि वह सुरक्षित रहे तथा सुरक्षित घर पर पहुंचे। मेरा मानना है कि यदि हमने नशे के व्यापार पर काबू पा लिया तो सड़क दुर्घटनायें भी बहुत कम होगीं जिसे देश की प्रगति होकर हम सफलता के नये आयाम स्थापित कर सकते है, दुर्घटनाओं पर खर्च होनी वाली राशि को देश की प्रगति में लगाकर हम अपने देश को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश बना सकते हैं। हमारे नौजवानों का खून सड़क पर नहीं फैलना चाहिये उनका खून अस्पताल में किसी के काम आना चाहिये यह बात हम सबको समझनी चाहिये।

इंडोनेशिया देश में कुछ युवाओं को नशा करने के लिए गिरफ्तार किया गया. नॉर्मल बात है. अक्सर युवा नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं. मगर ये नशा इतना बुरा है कि सुनकर उल्टी आ जाए.
ये टीनएजर्स इस्तेमाल किए हुए सेनेटरी पैड और डायपर पानी में उबालकर इसका लिक्विड बना रहे हैं. जो भी केमिकल इससे लिक्विड फॉर्म में मिलते हैं उसको पीकर ये नशा कर रहे हैं.
इंडोनेशिया के ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसी के प्रमुख परेशान हैं. क्योंकि ऐसा केस पहली बार आ रहा है. उनके मुताबिक़ इन युवाओं की उम्र 13 से 16 के बीच है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इन केमिकल्स को लेने से अजीब नतीजे होते हैं. कई युवाओं ने बताया कि इसे लेने के बाद उड़ने का आभास होता है. 14 साल के एक बच्चे ने पुलिस के सामने स्वीकारा इस लिक्विड को वो सुबह, दोपहर, शाम, तीनों समय लेते हैं.
अब इंडोनेशिया का स्वास्थ्य मंत्रालय ये पता लगाने की कोशिश में है कि नैपकिन और डायपर में ऐसा कौन सा केमिकल होता है. जिसे डिस्टिल करके नशा किया जा रहा है. वहां की लैब्स कहती हैं कि पैड में ऐसे कोई केमिकल नहीं होते तो सीधे तौर पर नशा देते हों. इसके अलावा पैड में जो केमिकल गीलापन सोखने के लिए जोड़े जाते हैं, वो शरीर को काफी नुकसान पहुंचाते हैं.
पहले तो 13 साल के बच्चे नशा करें, ये अपने आप में डरावनी बात है. उसपर इस नशे को पाने के लिए इतनी घटिया चीजों को इस्तेमाल हो, ये और डरावना है.


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