नन्हे किलकारीयों से गूंज उठे आशियाना - Silver Screen

नन्हे किलकारीयों से गूंज उठे आशियाना

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नन्हे किलकारीयों से गूंज उठे आशियाना


हर घर में मेला की ख्वाहिश होती है कि उसे मातृत्व का सुख हासिल हो मातृत्व उसके लिए सकून का जरिया भी बनता है लेकिन दुखद पहलू यह भी है कि विभिन्न कारणों के कारण महिलाएं इस मातृत्व सुख से वंचित हो जाते हैं महिलाओं में इनफर्टिलिटी का एक कारण बिगड़ी जीवन शैली भी है गलत लाइफ़स्टाइल के कारण कई महिलाएं संतान प्राप्ति से वंचित रह जाती हैं आइए जानते हैं लाइफ़स्टाइल में किन-किन बातों को अपनाएं और इनसे बचें ताकि मातृत्व सुख से वंचित ना और घर में निकुल का किलकारियां गूंज उठे.

 अधिक उम्र में मां बनना

 गलत लाइफस्टाइल की कई दुष्प्रभाव नवाबी हैं गलत जीवनशैली से महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर गलत असर पड़ता है अधिक उम्र में मां बनना भी इनफर्टिलिटी के कारण बन सकता है विशेषज्ञों के अनुसार महिला का झंडा लोगों की एक निश्चित संख्या के साथ होता है बढ़ती उम्र के साथ इनकी संख्या धीरे-धीरे घटने लगती है इसी से बड़ी उम्र में मां बनने में परेशानी आती है अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि कल जीवन शैली का प्रभाव पड़ता है इनकी गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है और वेरी में इनकी संख्या भी कम हो जाती है.

 बढ़ता हुआ मोटापा

आराम तलब जिंदगी में यह भी इनफर्टिलिटी बढ़ाने का काम किया है आराम तलबी और शारीरिक फिटनेस पर ध्यान नहीं देने पर भी मोटापा हावी हो जाता है जिससे शरीर विकृत हो जाता है और कई गंभीर बीमारियां भी शरीर में लग जाती हैं दूसरी तरफ पौष्टिक भोजन नहीं दिए जाने से जरूरत से ज्यादा कमजोरी आ जाती है यह दोनों स्थितियां मां बनने में रोड़ा पैदा कर सकती हैं विशेषज्ञों का मानना है कि ओवर बिटिया अंडरवेट होने से आपस में संतुलन की स्थिति हो जाती है इस वजह से ओवर लेशन में दिक्कत आती है ऐसी में नियमित एक्सरसाइज पोस्टिक भोजन जरूरी है ताकि दोनों की समस्या से बचा जा सके और इनफर्टिलिटी की समस्या पैदा ही ना हो.

धूम्रपान करना 

आजकल स्मोकिंग करना आम बात है और यह महिलाओं में भी आजकल देखने को मिल रही है वीडियो सिगरेट पीने से महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है एक्टिव एंड पैसिव स्मोकिंग से अंडों की गुणवत्ता नष्ट होती है और हार्मोन लेवल बिगड़ जाता है ओवरी में भंडारे तरह से नष्ट हो जाते हैं सिगरेट पीने वाली महिलाओं में रजोनिवृत्ति अन्य महिलाओं के मुकाबले 1 से 4 साल पहले तक आ सकती है.

 नशा और तनाव 

पौष्टिक खानपान के साथ जरूरी है कि जरूरत से ज्यादा चाय कॉफी शराब पीने की आदत देर रात तक जागने और सुबह देर तक सोने तनावपूर्ण जिंदगी प्रदूषण हाइजीन का ख्याल ना रखना और संयमित जीवन शैली मल्टीपल पाठक के साथ यौन संबंध रखना आदि ऐसी कुछ गलत आते हैं जो मातृत्व सुख से वंचित रख सकते हैं इस तरह की याद है सुकून और चैन की नींद से भी वंचित करती हैं इन से दूरी बना कर चलना ही हमारे जीवन के लिए बेहतर होगा और महिलाओं के लिए बहुत आवश्यक हो जाता है कि इस प्रकार  की आदतों को नजरअंदाज करें.

मातृत्व को अधिक डालना

 महिलाओं में एक ट्रेंड यह भी देखने को मिल रहा है कि वह अधिक उम्र में शादी के बाद भी लंबे समय तक मातृत्व को डालती रहती हैं विशेषज्ञों का मानना कि आमतौर पर 35 वर्ष की उम्र के बाद फर्टिलिटी कम होने लगती है ऐसे में मातृत्व में कितनी देर होगी कंसीव करने में उतनी ही परेशानी होगी इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ-साथ जेनेटिक असमानता भी बढ़ने लगती है और गर्भपात की आशंका भी बढ़ जाती है बेहतर यही होगा कि शादी के बाद मातृत्व अधिक डालना नहीं चाहिए.

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